Monday, 5 September 2016

छत्तीसगढ़ के पर्व 'तीजा परब'  की शुभकामनाएँ

दू दिन पहिली तीजा गे हे,
नोनी के महतारी ह,
हमला गजब बिजरावत हावय,
सबले छोटे सारी ह.

मन ह तन ह सुन्ना लागथे,
जिनगी सुन्ना भइगे.
चाबे ला दऊड़त हावय,
अपने घर के दुवारी ह.

दार-भात चिबराहा हो गे,
नूनछुर हो गे साग,
बिल्कुल नइ सुहावय संगी
संझा  के बियारी  ह.

संग राहय तब चिकचिक लागे,
वोकर गोठ-बात
अाज गजब गुदगुदावत हावय,
वोकर  देय  गारी.

बचपन मा जेकर संग खेलेन
उही टूरी मन आये हे
जहर बरोबर लागथे संगी,
उन्कर खीर-सोंहारी ह.

कतको कहि ले समरथ हन
मन के ये भरम ये,
चारे दिन मा पता चलगे
मनखे के हुसियारी ह.

@बलदाऊ राम साहू

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