Tuesday, 23 August 2016



भारत के वीर शहीदों को नमन


मस्जिद, गिरजा, शिवाले आओ,
ध्वज   लहराने    वाले    आओ,

आजादी    का    जश्न    मनाने,
देश      के    रखवाले    आओ.

झगड़े    पाले   क्यों   रखते  हो,
प्यार    लुटाने     वाले     आओ.

प्यार ,  प्यार  से  ही   बढ़ता  है,
बच्चे    सभी    निराले    आओ.

जात-पात   सब   मिट  जाएँगे ,
दूरी     मिटाने    वाले     आओ.

अपने  कुछ  राह  भटक  गए  हैं,
राह     दिखाने     वाले    आओ.

कोई    कहता   बिगड़   गया  है,
उन्हें     बनाने      वाले    आओ.

'बरस'  समझे   या   ना    समझे,
जाने     स़भी   अनजाने   आओ.

@बलदाऊ राम साहू
मो 9407650458


मुफत मा तैं खा ले बाबू

मुफत  मा तैं  खा ले बाबू,
हाथ मल पछता  ले  बाबू.

ऊपर-ऊपर गुरुतुर हावय,
अंतस ला  करुवा ले  बाबू.

कागद ल तैं नाव  बना  ले,
चुरुवा  मा  तँउरा  ले  बाबू.

अंतस म तोर कपट भरे  हे,
मीठ-मीठ गोठिया ले  बाबू.

नइ फरय हे पेड़ मा पइसा,
धर  ले अउ  हला ले  बाबू.

बन जा  नेता, कर  करतूत,
मान गजब तैं  पा  ले  बाबू.

जग म कतको हाँसत हावय,
उन  सब  ला  रोवा  ले बाबू.

बइरी बन  जा  अपनेच्च  बर,
अफसर   तैं   कहा  ले  बाबू.

बेंच  डार  ईमान-धरम  ला,
धरमातमा   कहा   ले  बाबू.

@बलदाऊ राम साहू
 मो 9407650458
गुरुतुर = मीठापन, चुरुवा = चुल्लू


छत्तीसगढ़ी लोक गीत ददरिया

छत्तीसगढ़ी लोक साहित्य में ददरिया का महत्वपूर्ण स्थान है. यह लोक काव्य के रूप में कंठ-कंठ मैं बसता है. किसी समय में यह श्रम परिहार का माध्यम हुआ करता था, तो कभी प्रणय निवेदन का सशक्त सशक्त साधन.  प्रेमी युगल इस लोक गीत के माध्यम से सहज रूप में अपने भावों को अभिव्यक्त करते थे. यदि साहित्यिक दृष्टिकोण से विश्लेषण करें तो ददरिया का बिंब विधान अनूठा जान पड़ता है. इसका छंद भी अनोखा है. इसका प्रत्येक पद दोहे की भाँति अपने आप में पूर्ण होता है. इसका पहला और दूसरा चरण केवल तुक मिलाने के लिए कहा जाता है, जबकि तीसरे और चौथे चरण में पूरी बात कही जाती है.
     ददरिया को हम वर्णिक छंद कह सकते हैं. किन्तु  इसमें पर्याप्त भेद हैं. लोक गायकों के द्वारा गाये गये ददरिया स्वरागम पर आधारित दिखाई देता है. ददरिया के मूल पद को गाने के पहले घोर(मुखड़ा) होता है. घोर के आधार पर ही पदों की स्वर रचना की जाती है.
उदाहरण के लिए एक स्वरचित ददरिया प्रस्तुत है. यह मात्र एक उदाहरण है -

लड़का - हमर गाँव तीर वो,
            अमुआ बगीचा हमर गाँव तीर.

लड़की - हमर गाँव तीर गा,
            नदिया कछार हमर गाँव तीर.

लड़का-पीपर रूख मा बइठे हे पंछी,
           तैं राधा बन जा गोई, बजाहूँ बंसी.

लड़की-धाने ला बोये हरियच्च-हरिया,
           का कहत हावस बाबू बनेच्च फरिहा.

लड़का- तेल-तेलाई तैं बनेच्च करले
            तोर अँछरा मा गोई मया ला धरले.          
लड़की-गये ल जंगल  टोरे ला तेंदू-चार
         मिलजुल के हम करबोन, मया के बइपार.

लड़का - माटी मताये पैरोसी धरले
             मोर बाते के गोई भरोसी करले.

लड़की- बँबूरी के रूख मा काँटच्च-काँटा
            मोर मया के तैं संगी झन करबे बाँटा.

   बलदाऊ राम साहू
  मो 9407650458

 

 यह कैसी सरकार रे भाई



यह  कैसी  सरकार रे भाई,
लूलों को  पतवार  रे  भाई.

जिन हाथों  में सत्ता दे  दी,
लुच्चा वही  लबार  रे  भाई.

माझी  ने  पतवार छोड़ दी,
डूबी नाव  मझधार  रे भाई.

जिन कंधों पर हल था कल तक,
उन  हाथों   तलवार   रे  भाई.

खुद की बंदूक सीना खुद का,
कैसी करूण  पुकार  रे  भाई.

अब तक मन में आस बंधी थी,
जीत  कहाँ  सब  हार  रे  भाई.

टूट  गए  हैं   सब  नाते-रिश्ते,
हर   आँगन    दीवार  रे  भाई.

@बलदाऊ राम साहू