Sunday, 18 December 2016

उन्कर बात  बेवहार  गजब 



उन्कर   बात  बेवहार  गजब,
जीये के सबो  अधार  गजब.

सब  के  जीना  दूभर   होगे,
सत्ता उन्कर सरकार  गजब.

मन मा कपट मुँह मा मिसरी,
बोली-बानी  मा  घार  गजब.

सब ले नजर बँचा  के  करथे,
उन्कर जम्मो  बइपार  गजब.

'बरस ' कहत हे सँभल के रहिबे,
कातिल  सरहद  के  पार  गजब.

-बलदाऊ राम साहू
मो 9407650458

थोरिक मुसकावन दे
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आँखी ले आँखी के बात होवन दे,
ऊपर ले चुप, अंतस गोठियावन दे।

अंतस के बात ह  अंतस तक पहुँचथे,
हिरदे ल  तैं  हिरदे ले  मिलावन  दे ।

सुवारथ के भाव ल दुरिहा राख तैं,
थोरिक हाँसन थोरिक मुसकावन दे ।

मया के कतको डोर उरझे हे जग म,
सुनता के जोर म येला फरियावन दे ।

मया जनम-जनम के नाता होथे ' 'बरस'
अंतस के राग- द्वेस ल टरियावन दे ।

मोदी के जबर कमाल हो गे रे 

ये  दे  मोदी  के  जबर  कमाल हो गे रे,
हमर देशे ह अब  मालामाल  हो  गे  रे.

राहुल हर रोवय अउ सोनिया हर रोवय,
दिग्विजय  के  मुँहू  हर  लाल  हो  गे  रे.

नीतिश अउर  लालू हर करम  ठठावय,
मुलायम  के अब  तो  हलाल  हो  गे  रे.

बहिन जी काहत  हे मोदी  बईमान  हे,
वोकरो   अब    हाल-बेहाल  हो  गे  रे.

कऊँवा कस कटरत अरविंद हर रहिस,
शरीफ़ के  कुकुर  कस  हाल  हो  गे  रे.

नेता अउ अफसर के थोथना हर टूट गे,
पईसा हर उन्कर बर अब काल हो गे रे.

पईसा ला ओढ़े  अऊर  पईसा  बिछावे.
उँकरो  घर पईसा के  अंकाल हो  गे  रे.

- बलदाऊ राम साहू
मो. 9407650458



या मोदी तेरा यह कैसा कमाल है 

या  मोदी तेरा  यह  कैसा  कमाल  है,
कल तक नवाब, वो आज फटेहाल है.

मुरझाये    मुलायम,   केजरी    गरमाये,
बहिन जी कहत हैं, यह सियासी चाल है.

राहुल जी दुखड़ा  अब  किसको सुनायें,
बाहर  मुस्काते   हैं,  भीतर   हलाल  हैं.

लालू औ' राबड़ी का खयाल जब पूछें,
कहते  हैं   हरदम  वे  मोदी  चांडाल  हैं

नेता   महाजन  जो  दौलत  दबाये  थे,
जीयेगे   कैसे  वो  और  ढाई  साल हैं

अफसर की बीबियाँ लगती चालाक थीं,
कल तक बेबाक थीं, वो आज बेहाल हैं.

सरहद पर जिनकी गिद्ध-सी निगाह थी,
कह रहें है   वे  भी  मोदी  नहीं  काल हैं

@बलदाऊ राम साहू
मो 9407650458



पाँच  बरस  बर  नेता बन  हरहा कस मेछरावत हे 


जेकर मुँह मा भाखा नइ हे किसिम-किसिम गोठियवत हे,
पाँच  बरस  बर   नेता   बन     हरहा  कस  मेछरावत  हे.

पद   ला   पा   के  अंते-तंते    रद्दा   मा   रेंगे   वो   मन
अपन  पूछी  ला   घेरी-बेरी   कुकुर   कस   सँहरावत हे.

बिद्वान  सही पूजत रहिथन   निचट  भकला हावन जी
सिधवा मनखे  ला वो मन  हा नाच   गजब  नचावत हे.

अगुआ  मन  के  तोनगी   घर  के  कुरसी  ला  पाये  हे
जम्मो   राजकोसी   धन   ला  धीरलगहा  पगुरावत   हे

सत्ता  के   मद   मा   जबर   बनगे   हे  अत्याचारी   रे,
लिखरी-लिखरी बात बर छाती ला गजब तनियावत हे.



जनता सबो बेहाल 

कोन पूछे काकर ले भैया
तिरपट नवा सवाल
जनता सबो बेहाल.

जम्मो डहर लूटपाट हे
मौज करें अपराधी
न्याय तराजू ऊँकरे हाथ मा
जिन्कर तन मा खादी
लोकतंत्र अब हमला लागथे
जीव के रे जंजाल.

चाल-चरित्तर मा कीरा परगे
फोकट गाल बजाये
साधु-संत के बाना धर के
पापी कस चाल चिन्हाये
हाँ मा हाँ मिलइया कतको
हावय इहाँ दलाल.

नवा-नवा इतिहास जम्मो झन
अपन-अपन लिखत हें
जेकर छप्पन के छाती हे
करनी मा दिखत हे
नाक बचा लेवव नकटा मन
पूछे प्रश्न बेताल.

कोख उझर कतको इहाँ
कब तक धीरज धरबो
मुढ़ ले पानी उप्पर होगे
सबर कब तक करबो
गुस्सा आँखी मा तउरत हे
छाती मा बरे  मशाल.

@बलदाऊ राम साहू
सहायक संचालक
आदिम जाति अनुसूचित जाति विकास
इंद्रावती भवन, नया रायपुर



साँपों को दूध पिलाया नहीं करते 



साँपों को दूध पिलाया नहीं करते ,
आस्तीन में उन्हें पाला नहीं करते ।

समय तेज उड़ रहा है पंख लगाकर
बीती बातों को विचारा नहीं  करते ।

बाधाएँ  आती  हैं,  राही  के  आगे,
पर हौसला यूँ ही हारा नहीं करते ।

मतलबी हैं सब कोई यहाँ पर मगर,
हर वक्त अपनों को पराया नहीं करते ।

छिपकर बैठे हों बहेलिए जब  आड़ में,
पंख  आसमाँ  में  पसारा  नहीं  करते ।


बलदाऊ राम साहू
9407650458