ग़ज़ल
अपने ही हाथों निखार किस्मत
गजब सयानी है यार किस्मत,
क्यूँ ठगती हर बार किस्मत.
सभी तरफ भूख औ' बेकारी,
मिले सब को भात-दार किस्मत.
सभी को रोटी-दाल नसीब हो,
चूल्हा उपास धिक्कार किस्मत,
किसी पर बरकत यूँ ही लुटाये,
हमें कर देती लाचार किस्मत.
मुबारक होली- दिवाली उन्हें
हमें रुलाती सौ - बार किस्मत.
'बरस'अब निराश क्यों हो रहा है,
अपने ही हाथों निखार किस्मत.
@बलदाऊ राम साहू
अपने ही हाथों निखार किस्मत
गजब सयानी है यार किस्मत,
क्यूँ ठगती हर बार किस्मत.
सभी तरफ भूख औ' बेकारी,
मिले सब को भात-दार किस्मत.
सभी को रोटी-दाल नसीब हो,
चूल्हा उपास धिक्कार किस्मत,
किसी पर बरकत यूँ ही लुटाये,
हमें कर देती लाचार किस्मत.
मुबारक होली- दिवाली उन्हें
हमें रुलाती सौ - बार किस्मत.
'बरस'अब निराश क्यों हो रहा है,
अपने ही हाथों निखार किस्मत.
@बलदाऊ राम साहू
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