Tuesday, 10 September 2019

नवगीत छत्तीसगढ़ी

नवगीत छत्तीसगढ़ी

जावन दे तैं घर

छोड़ दे नोनी अब तो मोला
जावन दे तैं घर।

छेरी-पटरू लुलवावत होही
बिन चारा-पानी के
कब तक हम गोठियायवत रहिबोन
कहनी अपन जवानी के ।

अभी उमर कचलोईहा हावय
मिलबोन आगू बछर।

खेत-खार बारी-बखरी के
करना हे तइयारी
बईठाँगूर, कमचोरहा कही के
देथे दाई हर गारी।

मिहनत कर के चढ़बोन नसैनी
तब जाबोन उप्पर ।

हरहिन्छा जीनगी जीये बर
जतन करे बर परही
सोच बिचार के काम करे मा
मन के दुविधा टरही ।

बिन नेत के छवावय नही
छानी के खदर ।

बलदाऊ राम साहू
9407650458

बाल गीत आना पंछी आना


आना पंछी

मेरे घर में आना पंछी
गीत मनोहर गाना पंछी।

मेरी गुड़िया भी आएगी,
साथ तुम्हारे वह गाएगी।

दूँगी तुमको दाना - पानी
नहीं करूँगी आना - कानी।

दूर - दूर कहीं मत जाना
पास में आकर नाच दिखाना।

बात करेंगे पास बैठकर,
कभी घर में, कभी छत पर।

-बलदाऊ राम साहू



नवगीत

नवगीत
बादर उप्पर बादर

सावन भादों दिखथे रुख के
हरियर-हरियर पाना ।

जंगल झाड़ी, खेती-बारी
दिखथे पाटी मारे
नदिया-नरवा, तरिया-डबरा
सुग्घर रूप सँवारे।

धर किसान हर राँपा-गैंती
गावत हावै गाना।

बादर उप्पर बादर नाचे
खाँद जोर संगवारी
ढोल बजावय ढम्मक-ढम्मक
हँसय फूल-फुलवारी।

फुदुक-फुदुक मछरी नाचत हे
मेंचका मारे ताना।

तान-तान चेलिक मोटियारी
गाँवैं गीत ददरिया
गाड़ी हाँके सुर मा गड़हा
कुलकत हे नँगरिहा।

देखत हावै गाँव शहर सब
देखत हावै जमाना।

-बलदाऊ राम साहू