Wednesday, 13 April 2016

बचपन की कुछ भूली-बिसरी यादों को इस तरह

बचपन मा  गजब  सैतानी करन,
खेल-खेल म हम बइमानी करन.

कोनो  चोरी  करत  धर ले हमला
छाती   तानन,   रंगदारी    करन.

खेलन,  खावन  करन मटरगस्ती,
काम-धाम म आना-कानी करन.

सगा पहुना खेल ह भावय  गजब,
बन  के  सियान,  सियानी  करन.

नइ  सुनन  दाई-ददा  के कहना,
'बरस' हमू गजब मनमानी करन.

एके  सुग्घर  वोमा   बात   राहय,
बिना भेद करे हम मितानी करन.

गाँव  सियान करे  झगरा-झंझट,
देख के हम  गजब  हैरानी करन.

लड़-झगर के मिल जाववन  कउखन,
भेदभाव  ल हम   पानी- पानी  करन.

सगा पहुना=बालपन का एक खेल, सियान=बुजूर्ग, दाई-ददा=माता-पिता, कउखन=शीघ्रतर.

@बलदाऊ राम साहू
 मो 9407650458