Friday, 16 September 2016

ग़ज़ल
तेरा ही अहसास राम जी

तेरा जब अहसास राम जी
तब कैसा सन्यास राम जी

जागे दया भाव जब मन में
शायद यही सुवास राम जी

राह बने और मंज़िल  पाएँ
वहीं  तुम्हारा  वास राम जी

तेरा हाथ औ’ सर  हो मेरा
मन क्यों रहे उदास राम जी

जब तक तेरी  कृपा  न होए
तब तक मन में प्यास राम जी

'बरस'  कहे व्यर्थ  है  दुनिया
अंतस का  विश्वास  राम  जी.

@बलदाऊ राम साहू
 मो 9407650458

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