ग़ज़ल
तेरा ही अहसास राम जी
तेरा जब अहसास राम जी
तब कैसा सन्यास राम जी
जागे दया भाव जब मन में
शायद यही सुवास राम जी
राह बने और मंज़िल पाएँ
वहीं तुम्हारा वास राम जी
तेरा हाथ औ’ सर हो मेरा
मन क्यों रहे उदास राम जी
जब तक तेरी कृपा न होए
तब तक मन में प्यास राम जी
'बरस' कहे व्यर्थ है दुनिया
अंतस का विश्वास राम जी.
@बलदाऊ राम साहू
मो 9407650458
तेरा ही अहसास राम जी
तेरा जब अहसास राम जी
तब कैसा सन्यास राम जी
जागे दया भाव जब मन में
शायद यही सुवास राम जी
राह बने और मंज़िल पाएँ
वहीं तुम्हारा वास राम जी
तेरा हाथ औ’ सर हो मेरा
मन क्यों रहे उदास राम जी
जब तक तेरी कृपा न होए
तब तक मन में प्यास राम जी
'बरस' कहे व्यर्थ है दुनिया
अंतस का विश्वास राम जी.
@बलदाऊ राम साहू
मो 9407650458
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