Friday, 8 July 2016

तोर आँखी  ले   काजर चोरा  लेतेंव,
तोला कइसनो  करके  अपना लेतेंव।
मैं धरती के मनखे,तैं अगास के फूल,
दूरिहा  ले  तोर  दरस  ला  पा  लेतेंव।
गजब आथे मन मा नवा-नवा बिचार,
हाँसत हन दुनो , सुग्घर सपना लेतेंव।
अँधियारी मा दीया कस तैं हर अँजोर,
बत्तर कस कीरा , मया ल लमा लेतेंव।
पुरखा   के   सपना   बंस   हमर  बाढ़े,
सावन कस आतेस, मन हरिया लेतेंव।
बलदाऊ राम साहू
मो 9407650458