Tuesday, 24 January 2017

सातो दिन इतवार बना दे मोर राम जी 


हर दिन ला तिवहार बना दे मोर राम जी,
सातो दिन  इतवार बना दे मोर  राम  जी.

मन काकरो नइ लागत हे  काम-धाम मा,
ठलहा  ला  सरदार  बना दे मोर राम जी.

इक दुसर के टाँग खींचें मा गजब मजा हे,
दुनिया  ला मक्कार बना दे मोर राम  जी,

लड़व-झगरव माथा फोरव भाई भाई के,
अँगना मा दीवार बना दे  मोर  राम  जी.

भाग भरोसा जिनगी जीथे मनखे मन हर,
उनला  तैं  बेकार बना  दे  मोर  राम  जी.

बलदाऊ राम साहू
 9407650458

Monday, 23 January 2017

गीत  देस  के  गाए   बर   हे, 


गीत   देस   के  गाए  बर  हे,
धरम  अपन  निभाए  बर  हे.

चल  संगवारी  हाथ  धर  के,
अंतस  बइर  मिटाए  बर  हे.

नजर झन लगे दुस्मन मन के,
ताकत अपन दिखाए  बर  हे.

आज  रात  घपटे  अंधियारी,
घर-घर  दिया जला़ए  बर  हे.

गजब  दूरिहा  जाना  हे  जी,
झटपट  पाँव  बढ़ाए  बर  हे,

-बलदाऊ राम साहू
 9407650458

Sunday, 22 January 2017

सत्ता  के  रखवाले  हमें   बताओ तो


सत्ता के रखवाले हमें बताओ तो
किनके  धन है काले हमें  बताओ तो.

स्विस बैंक में किसके कितने खाते हैं,
राज़   छुपाने   वाले  हमें  बताओ तो,

संसद के भीतर में क्या-क्या होता  है
कौन हैं किनके साले  हमें बताओ तो.

पानी   पर  भी  राजनीति करने वालो
किनकी   नदियाँ-नाले हमें बताओ तो.

तौर-तरीके़ अपने  ज़रा  बदल  देखो,
पीछे  चलने  वाले   हमें   बताओ तो.

सताये  गए  जो  उन्हें  हौसला   दे, 



सताये गए  जो  उन्हें  हौसला  दे
सुलगती हुई आग  को  तू  हवा  दे.

ज़माने के  क़िस्से बहुत पोथियों में,
पन्ने पलट कर  उन्हें  बस  पढ़ा  दे.

कँटीली डगर से  डरे  आदमी  को,
नज़दीक मंजिल है रास्ता दिखा दे.

मकसद पता ही नहीं ज़िंदगी  का
कदम यूँ न भटके, खुदा आसरा दे.

वो सवाल पर सवाल करता रहा  है,
जवाब उन सवालों के कोई  बता  दे.
             
 
बलदाऊ राम साहू
9407650458



अलग-अलग भूगोल कबीरा बोल ज़रा. 



अलग-अलग भूगोल कबीरा बोल ज़रा,
सबकी  परतें  खोल कबीरा बोल ज़रा,

सच्चाई  का  मोल  कहाँ  है  दुनिया  में,
सबकी भीतर पोल कबीरा बोल ज़रा,

चेहरों  पर  नकाब  लगाए  दिखते  हैं, .
सच्चे दिल अनमोल कबीरा बोल ज़रा,

भव सागर में फँसे  हुए  हैं लोग सभी.
आँखें उनकी खोल कबीरा बोल ज़रा,

धर्म  के  पुतले  बैठे  हैं  चोला  पहने,
नीयत डाँवा-डोल कबीरा बोल ज़रा,

घर-घर   में   ताले   हैं   पहरेदारी  है,
अंतस का पट खोल कबीरा बोल ज़रा.

इंसानों  में  भेद  कहाँ  कर  पाते  हैं,
ढोल के अंदर पोल कबीरा बोल ज़रा.

@बलदाऊ राम साहू