Wednesday, 25 May 2016

राजनीति  हर  काजर  के  कोठी  आय,
तभो समझथे मनखे  मन, बपोती आय.

जाँगर  टोर, बोहा  पछीना  धरती  बर,
धरती ले उपजही,   हीरा -मोती आय.

सरहद म गोली खात हे, लहू बोहात हे
देस म उजियार बगरईया जोती, अाय.

पर के सँथरा घी  देख  ललचाओ झन,
परके धन  हा  तो,  माटी-गोंटी  आय.

सूट-बूट पहिरे के का  मतलब  हावय,
इज्जत ढाके बर तो बस, लँगोटी आय.

काबर  दूसर  के छाती म दार  दरत हौ,
अपन बर  सोंहारी,  सुख्खा रोटी  आय.

@बलदाऊ राम साहू
  मो 9407650458
अपन हर बीरान होगे , अब तो गाँव  मा.
लुच्चा मन सियान होगे, अब तो गाँव मा.

कपटी मन अगुवा होगे,  करथे ग नियाव.
प्रपंच  हर  ग्यान  होगे,  अब तो गाँव  मा.

सुमत संग जीयन,आस अउ बिस्वास रहय.
मितान ह बइमान होगे,  अब  तो गाँव  मा.

गुरुतुर  गोठ  नँदागे,   टेंचरही   गोठियाथे.
बानी तीर-कमान होगे,  अब तो गाँव  मा.

एक बात बने होय हे, 'बरस'  तैं  बता  दे,
छोटे-बड़े समान होगे, अब तो  गाँव मा.

@बलदाऊ राम साहू
  मो 9407650458
कोन ला बतावन  संगी, अपन ग लचारी,
देस ला लुटत हावय, नेता  अउ  बइपारी.

फेसन के जुग आगे  काला  हम  बतावन,
डोकरी मन दिखथे, फकत  अटल कुवाँरी.

कमिया मन ल मिले नहीं ठोम्हा भर पसिया,
बइठाँगुर मन  झड़कत  हें,  बरा - सोंहारी.

फोकट के चऊँर , सुसी  भर  पीओ  दारू,
घर  मा  बइठे-बइठे, सब  के  करौ  चारी.

समरथ मन ला  घुना खागे करौ ग बिचार,
भरे सभा म हारत हे, दुरपती  ल  जुआरी.

भगतसिंग कहावत हें, लुच्चा अउ लफंगा,
'बरस' बइठे गुनत  रहिथे, अपन ग दुवारी.

@बलदाऊ राम साहू
 मो 9407650458