सारा जीवन बीत गया
लिखा हुआ है नाम सभी का
दाने-दाने में
सारा जीवन बीत गया, अब
भार उठाने में
दाने-दाने में
सारा जीवन बीत गया, अब
भार उठाने में
बचपन के वे खेल तमाशे
यौवन का उल्लास
रेतकणों-सा बिखर गया
अब तो मन उदास
लगा रहा अनसूलझे प्रश्नों के
उत्तर पाने में ।
यौवन का उल्लास
रेतकणों-सा बिखर गया
अब तो मन उदास
लगा रहा अनसूलझे प्रश्नों के
उत्तर पाने में ।
मन में एक आस बँधी थी
कल को सुघर बनाने
नन्हे कल के साथ फिर से
सपने नए सजाने
कल क्या, धूप-छाँव है?
लगा मुझे अनजाने में ।
कल को सुघर बनाने
नन्हे कल के साथ फिर से
सपने नए सजाने
कल क्या, धूप-छाँव है?
लगा मुझे अनजाने में ।
पंछी के संग उड़ चला मैं
आसमान की ओर
उड़ते गया पर कहीं न मिला
पाना था जिस छोर
सारा जीवन बीत गया
एक नीड बनाने में।
आसमान की ओर
उड़ते गया पर कहीं न मिला
पाना था जिस छोर
सारा जीवन बीत गया
एक नीड बनाने में।
