छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल
मन मा जब तक अहसास हावै जी।
अंतस मा सब उल्लास हावै जी।
कब तक खोजहु तुम बाहिर-बाहिर,
जम्मो तुहरेंच पास हावै जी।
सच हर हाँसत-मुसकावत हे जब
काबर मन हर उदास हावै जी।
अंतर मन ले कल लेवौ दरसन,
लकठा कासी कैलास हावै जी।
राम बसे हे तोर मन म जब तक,
'बरस' के मन ह उजास हावै जी।
लकठा= निकट, तुहरेंच =तुम्हारे।
बलदाऊ राम साहू
मन मा जब तक अहसास हावै जी।
अंतस मा सब उल्लास हावै जी।
कब तक खोजहु तुम बाहिर-बाहिर,
जम्मो तुहरेंच पास हावै जी।
सच हर हाँसत-मुसकावत हे जब
काबर मन हर उदास हावै जी।
अंतर मन ले कल लेवौ दरसन,
लकठा कासी कैलास हावै जी।
राम बसे हे तोर मन म जब तक,
'बरस' के मन ह उजास हावै जी।
लकठा= निकट, तुहरेंच =तुम्हारे।
बलदाऊ राम साहू
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