Saturday, 7 April 2018

अंतस मा उल्लास हावै

छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल

मन मा जब तक अहसास हावै जी।
अंतस मा  सब  उल्लास  हावै  जी।

कब तक खोजहु तुम बाहिर-बाहिर,
जम्मो    तुहरेंच   पास   हावै   जी।

सच हर  हाँसत-मुसकावत हे जब
काबर  मन  हर  उदास  हावै  जी।

 अंतर  मन  ले कल लेवौ  दरसन,
 लकठा कासी  कैलास  हावै  जी।

राम  बसे  हे  तोर मन म जब तक,
'बरस' के मन ह उजास  हावै  जी।

लकठा= निकट, तुहरेंच =तुम्हारे।

बलदाऊ राम साहू

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