छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल
उन मन तो मालामाल होवत हें।
जनता जम्मो कंगाल होवत हें।
हमन तो डार बरोबर पतझर के,
फागुन कस ओमन लाल होवत हें।
ओमन हर तो जी फरत-फूलत हें,
हमरे तो बारह हाल होवत हें।
करिया-करिया तो हम मन दिखथन,
उन मन गोरी के गाल होवत हें।
हम तो होगेन छोटकन उत्तर,
ओमन ह बड़का सवाल होवत हें।
बलदाऊ राम साहू
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