Wednesday, 11 April 2018

नव गीत 


नव गीत 

कुछ पाने की आस में 

हम तो बैठे रहे किनारे 
कुछ पाने की आस में. 

कौन यहाँ पर शोर कर रहा 
कौन बजा रहा बीन 
किसका खो गया राजपाट 
कौन किसके आधीन 
किसको मिला राजसिंहासन 
कौन गया वनवास में 

किसने चौसर चाल बिछायी
किसने दाँव लगाया 
किसने बाजी मार ली है 
कौन यहाँ पछताया 
कौन है जो राह तक रहा 
दूसरों के विश्वास में. 

करम पच्चीसी लिखी हुई है 
सबके माथे में
जय-पराजय,  सुख-दुख सब
होते हैं खाते में 
कोई उत्सव मना रहा है 
कोई है आवास में.

बलदाऊ राम साहू

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