छत्तीसगढ़ी गज़ल
सुरता के डोरी ला लमाए रख।
मन के बात ल मन मा छुपाए रख।
जिनगी मा सुख के गजब दिन देखेन,
सबे ल नहीं, आधा ला बचाए रख।
जखम कतको रहाय अपन दिल मा,
दिल के पीरा ल दिल मा दबाए रख।
मने-मन म कतका गुनत रहिथस तैं हर,
भीतर मा भाव सुघर जगाए रख।
‘बरस’ ये दुनिया हरे चारेच दिन के
ओकर संग मा लव तैं लगाए रख।
बलदाऊ राम साहू
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