Saturday, 31 March 2018

झन सँहराहू छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल

छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल

फूल समझ  के  झन  सँहराहू  धथुरा हे,
टमड़ के देख लौ दिल, ओकर पखरा हे।

सोच समझ के देहू  तुमन बिचार अपन
कौनो करिया, धँवरा  कौनो  कबरा  हे।

पीट-पीट  के  छाती जउन गोठियात हे,
झन समझहूँ दुखिया, ओमन  बपुरा हे।

बात-बात मा आँसू जउन बोहात  हावै,
सच कहत हौं नइ हे सिधवा, चतुरा हे।

कसम देस के खावत हे जउन मनखे मन
‘बरस’ कहत हे पक्का ओमन  लबरा  है।

झन सँहराहू= प्रसंशा मत करना, धथुरा=धतूरा , धँवरा=धवल, बपुरा = चालक, सिधवा= सीधा
बलदाऊ राम साहू 

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