धरती ले मया नँदागे, काबर कहिथस।
घर-घर म बइरासु आ गे, काबर कहिथस।
छत्तीसगढ़ म गुरुतुर - गुरुतुर भाखा हे,
भाखा-बोली हमर परागे, काबर कहिथस।
कभु नइ टूटय मया-पिरित के डोर इहाँ,
नाता-रिस्ता सब छरियागे, काबर कहिथस।
सब के घर म देवारी के दीया बरत हे,
अँधियारी ह भीतरी आ गे, काबर कहिथस।
'बरस' सबो दिन एक बरोबर नइ होय जी,
जम्मो हमरे भाग नठागे, काबर कहिथस।
बलदाऊ राम साहू
घर-घर म बइरासु आ गे, काबर कहिथस।
छत्तीसगढ़ म गुरुतुर - गुरुतुर भाखा हे,
भाखा-बोली हमर परागे, काबर कहिथस।
कभु नइ टूटय मया-पिरित के डोर इहाँ,
नाता-रिस्ता सब छरियागे, काबर कहिथस।
सब के घर म देवारी के दीया बरत हे,
अँधियारी ह भीतरी आ गे, काबर कहिथस।
'बरस' सबो दिन एक बरोबर नइ होय जी,
जम्मो हमरे भाग नठागे, काबर कहिथस।
बलदाऊ राम साहू
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