उन्कर बात बेवहार गजब
उन्कर बात बेवहार गजब,
जीये के सबो अधार गजब.
सब के जीना दूभर होगे,
सत्ता उन्कर सरकार गजब.
मन मा कपट मुँह मा मिसरी,
बोली-बानी मा घार गजब.
सब ले नजर बँचा के करथे,
उन्कर जम्मो बइपार गजब.
'बरस ' कहत हे सँभल के रहिबे,
कातिल सरहद के पार गजब.
-बलदाऊ राम साहू
मो 9407650458
No comments:
Post a Comment