Sunday, 18 December 2016

उन्कर बात  बेवहार  गजब 



उन्कर   बात  बेवहार  गजब,
जीये के सबो  अधार  गजब.

सब  के  जीना  दूभर   होगे,
सत्ता उन्कर सरकार  गजब.

मन मा कपट मुँह मा मिसरी,
बोली-बानी  मा  घार  गजब.

सब ले नजर बँचा  के  करथे,
उन्कर जम्मो  बइपार  गजब.

'बरस ' कहत हे सँभल के रहिबे,
कातिल  सरहद  के  पार  गजब.

-बलदाऊ राम साहू
मो 9407650458

No comments:

Post a Comment