Sunday, 18 December 2016



पाँच  बरस  बर  नेता बन  हरहा कस मेछरावत हे 


जेकर मुँह मा भाखा नइ हे किसिम-किसिम गोठियवत हे,
पाँच  बरस  बर   नेता   बन     हरहा  कस  मेछरावत  हे.

पद   ला   पा   के  अंते-तंते    रद्दा   मा   रेंगे   वो   मन
अपन  पूछी  ला   घेरी-बेरी   कुकुर   कस   सँहरावत हे.

बिद्वान  सही पूजत रहिथन   निचट  भकला हावन जी
सिधवा मनखे  ला वो मन  हा नाच   गजब  नचावत हे.

अगुआ  मन  के  तोनगी   घर  के  कुरसी  ला  पाये  हे
जम्मो   राजकोसी   धन   ला  धीरलगहा  पगुरावत   हे

सत्ता  के   मद   मा   जबर   बनगे   हे  अत्याचारी   रे,
लिखरी-लिखरी बात बर छाती ला गजब तनियावत हे.

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