अलग-अलग भूगोल कबीरा बोल ज़रा.
अलग-अलग भूगोल कबीरा बोल ज़रा,
सबकी परतें खोल कबीरा बोल ज़रा,
सच्चाई का मोल कहाँ है दुनिया में,
सबकी भीतर पोल कबीरा बोल ज़रा,
चेहरों पर नकाब लगाए दिखते हैं, .
सच्चे दिल अनमोल कबीरा बोल ज़रा,
भव सागर में फँसे हुए हैं लोग सभी.
आँखें उनकी खोल कबीरा बोल ज़रा,
धर्म के पुतले बैठे हैं चोला पहने,
नीयत डाँवा-डोल कबीरा बोल ज़रा,
घर-घर में ताले हैं पहरेदारी है,
अंतस का पट खोल कबीरा बोल ज़रा.
इंसानों में भेद कहाँ कर पाते हैं,
ढोल के अंदर पोल कबीरा बोल ज़रा.
@बलदाऊ राम साहू
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