Sunday, 22 January 2017




अलग-अलग भूगोल कबीरा बोल ज़रा. 



अलग-अलग भूगोल कबीरा बोल ज़रा,
सबकी  परतें  खोल कबीरा बोल ज़रा,

सच्चाई  का  मोल  कहाँ  है  दुनिया  में,
सबकी भीतर पोल कबीरा बोल ज़रा,

चेहरों  पर  नकाब  लगाए  दिखते  हैं, .
सच्चे दिल अनमोल कबीरा बोल ज़रा,

भव सागर में फँसे  हुए  हैं लोग सभी.
आँखें उनकी खोल कबीरा बोल ज़रा,

धर्म  के  पुतले  बैठे  हैं  चोला  पहने,
नीयत डाँवा-डोल कबीरा बोल ज़रा,

घर-घर   में   ताले   हैं   पहरेदारी  है,
अंतस का पट खोल कबीरा बोल ज़रा.

इंसानों  में  भेद  कहाँ  कर  पाते  हैं,
ढोल के अंदर पोल कबीरा बोल ज़रा.

@बलदाऊ राम साहू

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