Sunday, 18 December 2016

थोरिक मुसकावन दे
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आँखी ले आँखी के बात होवन दे,
ऊपर ले चुप, अंतस गोठियावन दे।

अंतस के बात ह  अंतस तक पहुँचथे,
हिरदे ल  तैं  हिरदे ले  मिलावन  दे ।

सुवारथ के भाव ल दुरिहा राख तैं,
थोरिक हाँसन थोरिक मुसकावन दे ।

मया के कतको डोर उरझे हे जग म,
सुनता के जोर म येला फरियावन दे ।

मया जनम-जनम के नाता होथे ' 'बरस'
अंतस के राग- द्वेस ल टरियावन दे ।

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