थोरिक मुसकावन दे
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आँखी ले आँखी के बात होवन दे,
ऊपर ले चुप, अंतस गोठियावन दे।
अंतस के बात ह अंतस तक पहुँचथे,
हिरदे ल तैं हिरदे ले मिलावन दे ।
सुवारथ के भाव ल दुरिहा राख तैं,
थोरिक हाँसन थोरिक मुसकावन दे ।
मया के कतको डोर उरझे हे जग म,
सुनता के जोर म येला फरियावन दे ।
मया जनम-जनम के नाता होथे ' 'बरस'
अंतस के राग- द्वेस ल टरियावन दे ।
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