Thursday, 17 March 2016

बिपत  म हे  संसार, का करन,
लुटत हे  ये  बजार, का  करन.

नाता- रिस्ता  सुवारथ  के  हे,
मतलब के सब  यार, का  करन.

घर - दुवार  सब  खेत  बेंचागे,
इज्जत  तार  -तार, का  करन.

मुख हर दिखथे कुलकत हावय
अंतस  म  अँधियार, का  करन.

घर  के जोरु पर-बुधनिन  होगे
'बरस' खड़े मुँह फार, का करन,

@बलदाऊ राम साहू

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