गीत देस के गाए बर हे,
गीत देस के गाए बर हे,
धरम अपन निभाए बर हे.
चल संगवारी हाथ धर के,
अंतस बइर मिटाए बर हे.
नजर झन लगे दुस्मन मन के,
ताकत अपन दिखाए बर हे.
आज रात घपटे अंधियारी,
घर-घर दिया जला़ए बर हे.
गजब दूरिहा जाना हे जी,
झटपट पाँव बढ़ाए बर हे,
-बलदाऊ राम साहू
9407650458
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