Monday, 8 September 2014

चिडि़या



चिडि़या चुन-चुन तिनके लाती,
फिर उनसे वह नीड बनाती।

रोज सजाती सुंदर सपने 
बैठ घोसले में वह अपने।

बच्चों का होगा संसार
खूब करूँगी उनसे प्यार ।

दाने चुन-चुनकर लाऊँगी
स्वयं उन्हें मैं चुगवाऊँगी।


फिर वे डैने फैलाएँगे
अंबर में उड़-उड़ जाएँगे।

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