महापुरुष बन जाओ
मिहनत कर जो आगे बढ़ते
सफल वही कहलाते हैं
संघर्षों को गले लगाते
इतिहास वही बनाते हैं
मिहनत करता, पानी देता
नन्हीे पौध उगाता है
हरदम जिसका बहा पसीना
धरा पूत कहलाता है ।
महापुरुष तो बचपन से ही
लक्ष्य बड़ा बनाते हैं
एक न एक दिन उनको पूरा
करके वे दिखलाते हैं।
तुम भी बच्चों मिहनत करके
कुछ नव करके दिखलाओ
कठिन पंथ अपनाओ औ' फिर
महापुरुष तुम बन जाओ।
-बलदाऊ राम साहू
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