manjri
Saturday, 8 August 2020
लबरा होगे बदर
बादर लबरा होगे...*
अब असाढ़ ले सावन आगे
तरिया नदिया सबो सुखागे।
तोर अगोरा म बइठे-बइठे
बिन पानी के बुध सिरागे
जीव-जन्तु सब तड़पत हावै
लागत हवे कलजुग हमागे।
तीपत भोंभरा फोरा परगे
बादर लबरा कहाँ परागे।
द्रोण साहू
मोका, गुंडरदेही
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