नवगीत छत्तीसगढ़ी
जावन दे तैं घर
छोड़ दे नोनी अब तो मोला
जावन दे तैं घर।
छेरी-पटरू लुलवावत होही
बिन चारा-पानी के
कब तक हम गोठियायवत रहिबोन
कहनी अपन जवानी के ।
अभी उमर कचलोईहा हावय
मिलबोन आगू बछर।
खेत-खार बारी-बखरी के
करना हे तइयारी
बईठाँगूर, कमचोरहा कही के
देथे दाई हर गारी।
मिहनत कर के चढ़बोन नसैनी
तब जाबोन उप्पर ।
हरहिन्छा जीनगी जीये बर
जतन करे बर परही
सोच बिचार के काम करे मा
मन के दुविधा टरही ।
बिन नेत के छवावय नही
छानी के खदर ।
बलदाऊ राम साहू
9407650458
जावन दे तैं घर
छोड़ दे नोनी अब तो मोला
जावन दे तैं घर।
छेरी-पटरू लुलवावत होही
बिन चारा-पानी के
कब तक हम गोठियायवत रहिबोन
कहनी अपन जवानी के ।
अभी उमर कचलोईहा हावय
मिलबोन आगू बछर।
खेत-खार बारी-बखरी के
करना हे तइयारी
बईठाँगूर, कमचोरहा कही के
देथे दाई हर गारी।
मिहनत कर के चढ़बोन नसैनी
तब जाबोन उप्पर ।
हरहिन्छा जीनगी जीये बर
जतन करे बर परही
सोच बिचार के काम करे मा
मन के दुविधा टरही ।
बिन नेत के छवावय नही
छानी के खदर ।
बलदाऊ राम साहू
9407650458
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