Tuesday, 10 September 2019

नवगीत छत्तीसगढ़ी

नवगीत छत्तीसगढ़ी

जावन दे तैं घर

छोड़ दे नोनी अब तो मोला
जावन दे तैं घर।

छेरी-पटरू लुलवावत होही
बिन चारा-पानी के
कब तक हम गोठियायवत रहिबोन
कहनी अपन जवानी के ।

अभी उमर कचलोईहा हावय
मिलबोन आगू बछर।

खेत-खार बारी-बखरी के
करना हे तइयारी
बईठाँगूर, कमचोरहा कही के
देथे दाई हर गारी।

मिहनत कर के चढ़बोन नसैनी
तब जाबोन उप्पर ।

हरहिन्छा जीनगी जीये बर
जतन करे बर परही
सोच बिचार के काम करे मा
मन के दुविधा टरही ।

बिन नेत के छवावय नही
छानी के खदर ।

बलदाऊ राम साहू
9407650458

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