Tuesday, 10 September 2019

नवगीत

नवगीत
बादर उप्पर बादर

सावन भादों दिखथे रुख के
हरियर-हरियर पाना ।

जंगल झाड़ी, खेती-बारी
दिखथे पाटी मारे
नदिया-नरवा, तरिया-डबरा
सुग्घर रूप सँवारे।

धर किसान हर राँपा-गैंती
गावत हावै गाना।

बादर उप्पर बादर नाचे
खाँद जोर संगवारी
ढोल बजावय ढम्मक-ढम्मक
हँसय फूल-फुलवारी।

फुदुक-फुदुक मछरी नाचत हे
मेंचका मारे ताना।

तान-तान चेलिक मोटियारी
गाँवैं गीत ददरिया
गाड़ी हाँके सुर मा गड़हा
कुलकत हे नँगरिहा।

देखत हावै गाँव शहर सब
देखत हावै जमाना।

-बलदाऊ राम साहू


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