नवगीत
बादर उप्पर बादर
सावन भादों दिखथे रुख के
हरियर-हरियर पाना ।
जंगल झाड़ी, खेती-बारी
दिखथे पाटी मारे
नदिया-नरवा, तरिया-डबरा
सुग्घर रूप सँवारे।
धर किसान हर राँपा-गैंती
गावत हावै गाना।
बादर उप्पर बादर नाचे
खाँद जोर संगवारी
ढोल बजावय ढम्मक-ढम्मक
हँसय फूल-फुलवारी।
फुदुक-फुदुक मछरी नाचत हे
मेंचका मारे ताना।
तान-तान चेलिक मोटियारी
गाँवैं गीत ददरिया
गाड़ी हाँके सुर मा गड़हा
कुलकत हे नँगरिहा।
देखत हावै गाँव शहर सब
देखत हावै जमाना।
-बलदाऊ राम साहू
बादर उप्पर बादर
सावन भादों दिखथे रुख के
हरियर-हरियर पाना ।
जंगल झाड़ी, खेती-बारी
दिखथे पाटी मारे
नदिया-नरवा, तरिया-डबरा
सुग्घर रूप सँवारे।
धर किसान हर राँपा-गैंती
गावत हावै गाना।
बादर उप्पर बादर नाचे
खाँद जोर संगवारी
ढोल बजावय ढम्मक-ढम्मक
हँसय फूल-फुलवारी।
फुदुक-फुदुक मछरी नाचत हे
मेंचका मारे ताना।
तान-तान चेलिक मोटियारी
गाँवैं गीत ददरिया
गाड़ी हाँके सुर मा गड़हा
कुलकत हे नँगरिहा।
देखत हावै गाँव शहर सब
देखत हावै जमाना।
-बलदाऊ राम साहू
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