प्यार गँवागे,
बढ़गे नफरत।
मनखे लोभी,
उनकर फितरत।
सच के रद्दा,
हावै आफत।
चारो डहर,
गफलत-गफलत।
ये दुनिया मा,
दुखिया औरत।
इहाँ कौन ला,
हावै फुरसत।
गदहा खावै,
हर दिन दावत।
‘बरस’ कौन कर,
करें शिकायत।
बलदाऊ राम साहू
बढ़गे नफरत।
मनखे लोभी,
उनकर फितरत।
सच के रद्दा,
हावै आफत।
चारो डहर,
गफलत-गफलत।
ये दुनिया मा,
दुखिया औरत।
इहाँ कौन ला,
हावै फुरसत।
गदहा खावै,
हर दिन दावत।
‘बरस’ कौन कर,
करें शिकायत।
बलदाऊ राम साहू
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