Wednesday, 25 May 2016

राजनीति  हर  काजर  के  कोठी  आय,
तभो समझथे मनखे  मन, बपोती आय.

जाँगर  टोर, बोहा  पछीना  धरती  बर,
धरती ले उपजही,   हीरा -मोती आय.

सरहद म गोली खात हे, लहू बोहात हे
देस म उजियार बगरईया जोती, अाय.

पर के सँथरा घी  देख  ललचाओ झन,
परके धन  हा  तो,  माटी-गोंटी  आय.

सूट-बूट पहिरे के का  मतलब  हावय,
इज्जत ढाके बर तो बस, लँगोटी आय.

काबर  दूसर  के छाती म दार  दरत हौ,
अपन बर  सोंहारी,  सुख्खा रोटी  आय.

@बलदाऊ राम साहू
  मो 9407650458

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