मौन बस्तर की माटी
पंछी मौन हैं, लोग मौन हैं,
मौन बस्तर की माटी।
मौन बस्तर की माटी।
गौर श्रृंग से आभूषित थे
उल्लसित था मन
हँसमुख था उनका चेहरा
ताँबिया जैसा तन
गलबैहाँ डाले चलतीं थीं
बालाएँ मारे पाटी।
उल्लसित था मन
हँसमुख था उनका चेहरा
ताँबिया जैसा तन
गलबैहाँ डाले चलतीं थीं
बालाएँ मारे पाटी।
सन्नाटा-सा बना हुआ है
बीहड़ शाल वनों में
विकट उदासी कैसी मन में
भय का ज्वर जनों में
जंगल के सब पेड़ मौन है
पर्वत नदियाँ घाटी।
बीहड़ शाल वनों में
विकट उदासी कैसी मन में
भय का ज्वर जनों में
जंगल के सब पेड़ मौन है
पर्वत नदियाँ घाटी।
मातु-पितु से वंचित हुए
कितने नन्हे बच्चें
कितनों की आँख खुली थी
कितने अभी अधकच्चे
देशहित में काम जब आते
फूलती अपनी छाती।
कितने नन्हे बच्चें
कितनों की आँख खुली थी
कितने अभी अधकच्चे
देशहित में काम जब आते
फूलती अपनी छाती।

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