बाल साहित्य से
चिडि़या
चिडि़या चुन-चुन तिनके लाती,
फिर उनसे वह नीड बनाती।
फिर उनसे वह नीड बनाती।
रोज सजाती सुंदर सपने
बैठ घांेसले में वह अपने।
बैठ घांेसले में वह अपने।
बच्चों का होगा संसार
खूब करूँगी उनसे प्यार ।
खूब करूँगी उनसे प्यार ।
दाने चुन-चुनकर लाऊँगी
स्वयं उन्हें मैं चुगवाऊँगी।
स्वयं उन्हें मैं चुगवाऊँगी।
फिर वे डैने फैलाएँगे
अंबर में उड़-उड़ जाएँगे।
अंबर में उड़-उड़ जाएँगे।

बहुत ही सुन्दर बाल रचना है ... चिड़िया की कहानी आज भी अच्छी लगती है ...
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