Sunday, 4 June 2017

काबर गजब इतरावत हस, चुरी ल अपन खनकावत हस. सुन लेतेस हमरो थोरिक अपने ला तैं सुनावत हस. लागथे हमला बात-बात मा तैं हर गजब अरझावत हस. आभा मार के तैं ह गोई पानी म आगी लगावत हस. तरिया जस हे भरे जवानी जीव ला कबार जरावत हस. 'बरस' कहत हे बात बने हे ठेगा काबर देखावत हस. बलदाऊ राम साहू 9407650458

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