काबर गजब इतरावत हस,
चुरी ल अपन खनकावत हस.
सुन लेतेस हमरो थोरिक
अपने ला तैं सुनावत हस.
लागथे हमला बात-बात मा
तैं हर गजब अरझावत हस.
आभा मार के तैं ह गोई
पानी म आगी लगावत हस.
तरिया जस हे भरे जवानी
जीव ला कबार जरावत हस.
'बरस' कहत हे बात बने हे
ठेगा काबर देखावत हस.
बलदाऊ राम साहू
9407650458
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