धूप और खछाँव-सी जिंदगी
कौवों की काँव-सी जिंदगी,फटे हुए पाँव - सी जिंदगी.
खुशियों की मेघ कैसे लाएँ,
धूप और छाँव-सी जिंदगी.
अंतस के भाव कहीं खो गए,
है 'सियासी दाँव-सी जिंदगी.
रिश्तों में अब कहाँ मिठास है,
उजड़े हुए गाँव-सी जिंदगी.
हाथों से छिनता पतवार अब
लड़खड़ाती नाव-सी जिंदगी.
बलदाऊ राम साहू
9407650458
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